गन्ने की फसल खर्चीली होने से किसानों का मन बदला
रुड़की
इलाके में टिकोला, नारसन कला, मखदुमपुर और सुसाडा आदि गांव में पिछले कुछ सालों में किसानों ने करेले की फसल को उगाना शुरू किया। जिस पर लागत कम और मुनाफा अधिक मिल रहा है। किसान सत्यपाल सिंह, जनक सिंह, कवर पाल सिंह, प्रदीप कुमार और भीम आदि ने बताया कि करेले की फसल 30 से 40 दिन में पककर तैयार हो जाती है। जिसके बाद इस फसल से प्रति बीघा गन्ना फसल से ज्यादा मुनाफा मिलता है। जबकि गन्ने की फसल एक साल में तैयार होती है। करेले की फसल के साथ-साथ खीरा, लौकी और गोभी आदि की फसल भी इसी फसल के साथ तैयार हो जाती है। उन्होंने बताया कि गन्ने की फसल की अपेक्षा करेले की फसल ज्यादा मुनाफा देने वाली साबित हो रही है। इस फसल को दिल्ली मंडी भेजा जाता है। जहां से उन्हें इस फसल को बेचकर नगद पैसा मिल जाता है। जबकि गन्ने की फसल में गन्ना कोल्हू पर ओने पौने दाम मिलते हैं और चीनी मिल अपने मन मुताबिक गन्ना भुगतान करती है। पेस्टिसाइड विक्रेता आजाद सिंह ने बताया कि इलाके में करेले की फसल को लेकर किसानों में भारी रुझान है।
