आजाद हार्ड लाइन लेकर राजनीति करेंगे

गुलाम नबी आजाद ने पार्टी का ऐलान नहीं किया है लेकिन अपनी पार्टी का एजेंडा घोषित कर दिया है और उससे साफ हो गया है कि उनकी चुनावी रणनीति क्या होगी? वे हार्ड लाइन लेकर ही राजनीति करेंगे। जैसे कश्मीर घाटी की दूसरी प्रादेशिक पार्टियां- जैसे नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी, अपनी पार्टी आदि राजनीति कर रही हैं उसी तरह आजाद की पार्टी भी राजनीति करेगी। उनके बारे में भले यह धारणा बन रही है कि वे भाजपा की बी टीम हैं और भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए राजनीतिक दल बना रहे हैं लेकिन उनका एजेंडा हार्ड लाइन पार्टी वाला होगा तभी उनको कश्मीर घाटी में वोट मिल पाएंगे। अगर उन्होंने एजेंडा भी भाजपा वाला रखा तो उनको न जम्मू में वोट मिलेंगे और न घाटी में है। उनको अपने एजेंडे और प्रचार से दिखाना है कि वे भाजपा की बी टीम नहीं हैं, बल्कि भाजपा से भी लड़ रहे हैं।
तभी उन्होंने पार्टी की घोषणा करने से पहले अपनी रैली में पार्टी के तीन एजेंडे बताए। आजाद ने बताया कि वे जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल कराने के लिए काम करेंगे। यह कोई एजेंडा नहीं है क्योंकि सरकार ने कहा है कि वह राज्य का दर्जा बहाल करेगी। जम्मू कश्मीर अनंतकाल तक केंद्र शासित प्रदेश नहीं रहने वाला है। सवाल सिर्फ इतना है कि विधानसभा चुनाव से पहले राज्य का दर्जा बहाल हो जाएगा या उसके बाद होगा। लेकिन आगे के दो एजेंडे हार्ड लाइन वाले हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी यह सुनिश्चित करेगी कि सिर्फ जम्मू कश्मीर के लोगों को ही राज्य में नौकरी मिले और सिर्फ स्थानीय लोग ही जमीन खरीद पाएं। यानी बाहर के लोग न जमीन खरीद सकें और न नौकरी कर सकें। यह पीडीपी, नेशनल कांफ्रेंस जैसी पार्टियों का एजेंडा है। लेकिन ऐसा होगा नहीं क्योंकि फिर अनुच्छेद 370 और 35ए समाप्त करने का मकसद पूरा नहीं हो पाएगा। इस बात को आजाद भी जानते हैं फिर भी वे अपने को घाटी के मुसलमानों का मसीहा बताने के लिए इन मुद्दों पर राजनीति करेंगे। उनको पता है कि तभी वोट मिल पाएगा और वे कुछ हद तक भाजपा का मकसद पूरा कर पाएंगे।

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