शिवालिकनगर क्लस्टर-आर पम्प परिसर बदहाल, जिम्मेदार अफसर अनजान

हरिद्वार —

केंद्र से लेकर राज्य, सांसद, विधायक और नगरपालिका अध्यक्ष—हर स्तर पर भाजपा की सत्ता होने के बावजूद रानीपुर विधानसभा क्षेत्र में स्वच्छ भारत मिशन पूरी तरह फेल नजर आ रहा है। शिवालिकनगर योजना, सेक्टर-3 स्थित क्लस्टर-आर जल संस्थान पम्प परिसर की हालत ने न केवल सरकारी दावों की पोल खोल दी है, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता और राजनीतिक संरक्षण के गंभीर आरोपों को भी जन्म दिया है।

रानीपुर विधायक आदेश चौहान के कैम्प कार्यालय के ठीक सामने स्थित जल टंकी परिसर में गंदगी, कूड़ा, झाड़ियां और टूटे निर्माण कार्य खुलेआम प्रशासन को चुनौती देते दिख रहे हैं। सवाल यह है कि जब यह हाल विधायक कार्यालय के सामने है, तो बाकी क्षेत्रों की स्थिति क्या होगी?

पम्प निर्माण के बाद बने गड्ढे वर्षों से जस के तस पड़े हैं, जो यह दर्शाता है कि न तो किसी अधिकारी ने निरीक्षण किया और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने जवाबदेही तय की। नियमों को ताक पर रखकर पानी की पाइपलाइन खुले में डाली गई है।

चारदीवारी टूटने से आवारा पशु परिसर में गंदगी करते है। वहीं पम्प संचालन कक्ष में टूटा फर्श और असुरक्षित मशीनें किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही हैं। इसके बावजूद जल संस्थान के अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।

हरिद्वार की सबसे पोर्श कालोनी है जहा पर शिक्षित व व्यापारी वर्ग के व्यक्ति/परिवार रहते है। जिनका पानी के बिल समय पर चुकाते हैं, फिर भी उन्हें गंदगी और खतरे के साये में रहने को मजबूर किया जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि क्या केंद्र से लेकर राज्य, सांसद, विधायक और नगरपालिका अध्यक्ष तक के सभी प्रतिनिधि​यो द्वारा स्वच्छ भारत मिशन सिर्फ विज्ञापनों और भाषणों तक सीमित रह गया है?

करोड़ों रुपये स्वच्छता अभियानों पर खर्च करने के बाद भी यदि पोश कॉलोनियों में यह हाल है, तो साफ है कि नीतियों का लाभ जनता तक नहीं, बल्कि फाइलों तक सीमित है। जल संस्थान की इस लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा। स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर केंद्र और राज्य सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जल संस्थान के अधिकारी पूरी तरह लापरवाह बने हुए हैं। स्वच्छता के अभाव में लोग रोज़ाना परेशानी झेलने को मजबूर हैं।

जल संस्थान के जिम्मेदार अधिकारी कब तक आंखें मूंदे रहेंगे, और प्रशासनिक स्तर पर तय जवाबदेही कब सुनिश्चित की जाएगी। यदि शीघ्र कार्यवाही नहीं हुई, तो यह मामला केवल स्वच्छता का नहीं बल्कि जन-सुरक्षा और प्रशासनिक विफलता का भी बन सकता है।

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