पेट्रोल-डीजल के बाद अब कमर तोड़ रही सीएनजी, जानें क्या है वजह
जयपुर।
किसी ने कभी भी यह नहीं सोचा होगा की एक समय ऐसा भी आएगा, जब पेट्रोल और सीएनजी के दामों में सिर्फ दस रुपए का अंतर रह जाएगा। जो वाहन चालक पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से परेशान थे, उन्होंने सीएनजी की तरफ रूख किया, आज वे पछता रहे हैं कि किट लगवाने में रुपए क्यों खर्च किए। प्रदेश में प्रदूषण कम करने के इरादे से सीएनजी को बढ़ावा दिया गया था, उसी प्रदेश में आज सीएनजी के दाम पेट्रोल के दामों के साथ कदम से कदम मिला रहे है। एक तरफ, सरकार लोगों को पेट्रोल और डीजल के वाहनों की बजाए सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए प्रोत्साहित कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सीएनजी के दामों में बढ़ोतरी करके लोगों को असमंजस में डाल रही है।
प्रदेश में हजारों की संख्या में निम्न और निम्न मध्यमवर्गीय परिवार, सीएनजी लगी कारें या ऑटो के जरिए अपना परिवार पाल रहे हैं। इन परिवारों का बजट गड़बड़ा चुका है। किराया बढ़ाते हैं तो लोग देने को तैयार नहीं हैं क्याेंकि किराया पहले ही बढ़ाया जा चुका था। अब बढ़ा दिया तो लोग बैटरी रिक्शा या इलेक्ट्रिक बस से सफर करना पसंद करेंगे। इस स्थिति में महंगी सीएनजी के चलते गाड़ी चलाना और परिवार पालना, दोनाें ही मुश्किल हो चुके हैं। जयपुर में सीएनजी का भाव 95 रुपए प्रति किलोग्राम हो चुका है। वहीं पेट्रोल के दाम 108.48 रुपए और डीजल के दाम 93.72 रुपए प्रति लीटर हो चुके हैं।
सीएनजी शोटेज से भी लोग परेशान
दूसरी तरफ, सीएनजी की शोटेज को भी लेकर लोग काफी परेशान है। आजकल जगह-जगह सीएनजी स्टेशन पर आपको गाड़ियों की लंबी कतारें सीएनजी भराने के लिए देखने को मिल रही है। लेकिन सीएनजी भी पेट्रोल -डीजल की तरह राजस्थान में ही पूरे देश में कमोबेश सबसे महंगा बिक रहा है। इसका कारण भी राजस्थान में सीएनजी पर अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक वैट है। हालांकि सीएनजी में चूंकि निजी कंपनियां ही अधिक हैं, इसलिए इनके दाम पूरे देश में एक जैसे नहीं हैं और जिस जिले में जिस कंपनी को ठेका मिल हुआ है, उसमें वही अपने लिए उचित प्रतिस्पर्धी दाम पर तय करती है और उस पर बेचने के लिए स्वतंत्र है। उदाहरण के लिए जयपुर में टौरेंट गैस का ठेका है और उदयपुर में अडानी गैस। लेकिन कंपनी कोई भी हो, राजस्थान में सीएनजी के दाम अपेक्षाकृत पूरे देश के सबसे अधिक ही हैं। इसकी प्रमुख वजह एक ही है राजस्थान में सीएनजी पर 16 प्रतिशत वैट लगता है, जबकि हरियाणा में 6 प्रतिशत और महाराष्ट्र में तो सीएनजी पर वैट को कम कर 3 प्रतिशत कर दिया गया है।
कंपनियों को जिला आधारित ठेके
सीएनजी में फिलहाल कंपनियों को जिला आधारित ठेके दिए जाते हैं। कंपनी इसके दाम तय करने में पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। कंपनियां इसके दाम तय करने में अपनी खरीद, लागत और आसपास के जिलों में सीएनजी के दाम देखकर प्रतिस्पर्धी आधार पर भाव तय करती हैं। इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं होती। सरकार सिर्फ उचित टैक्स वसूल सकती है।
