महाराष्ट्र सरकार पर मंडराए संकट के बादल, चार-पांच विधायक छिटके तो दलबदल कानून के दायरे में आ जाएंगे सीएम शिंदे
मुंबई
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकर के नेतृत्व वाली सरकार का तख्तापलट कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एकनाथ शिंदे की अगुआई में नई सरकार का गठन किया। नई सरकार को तीन महीने भी नहीं हुए हैं कि एकनाथ शिंदे सरकार मुश्किल में घिरती दिखाई दे रही है। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे खेमे के कुछ विधायक पाला बदल कर उद्धव खेमे की ओर जा सकते हैं। ज्ञात हो कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के कुछ विधायकों ने बगावत कर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी सरकार को गिरा दिया था और भाजपा के सहयोग से नई सरकार बना ली थी। अब बताया जाता है कि कुछ विधायक सीएम एकनाथ शिंदे से नाराज हैं और वे वापस मूल संगठन में जा सकते हैं।
हाल ही में मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान एकनाथ शिंदे खेमे के 9 विधायकों ने मंत्रिपद कि शपथ ली थी। एकनाथ शिंदे खेमे के 31 अन्य विधायक भी मंत्री बनने की लालसा में बैठे हुए हैं। इनमें से सभी विधायक मंत्री बनना चाहता है। इस मांग को पूरा कर पाना संभव नहीं है, इसी वजह से पार्टी दूसरी बार अपने मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं कर पा रही है। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री नहीं बनाए जाने पर कुछ विधायक एक बार फिर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले मूल संगठन में लौट सकते हैं।
आपको बता दें कि असली शिवसेना बनाम नकली शिवसेना की लड़ाई भी अभी चल रही है। मामला सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग में लंबित है। ऐसे में अगर एकनाथ शिंदे खेमे से कुछ विधायक वापस मूल संगठन में लौट गए तो दलबदल कानून का खतरा पैदा हो सकता है। दरअसल, शिवसेना के कुल 54 विधायक हैं और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में करीब 40 विधायकों ने पाला बदल लिया था। ऐसे में अगर 3-4 विधायक एकनाथ शिंदे का साथ छोड़ते हैं, तो दलबदल कानून का खतरा पैदा हो जाएगा। विधायकों की नाराजगी को देखते हुए ही दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार नहीं हो पा रहा है, क्योंकि एकनाथ शिंदे यह जानते हैं कि सभी को मंत्री नहीं बनाया जा सकता है। दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे का सहयोग कर रही भाजपा को भी मंत्रिमंडल विस्तार से काफी उम्मीदें हैं। भाजपा के कई विधायकों को उम्मीद है उन्हें मंत्रिपद मिल सकता है इसके अलावा छोटी सहयोगी पार्टियां भी मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी चाहती हैं।
