खून के थक्के जमने से टांगों में सूजन, दर्द, भारीपन और रंग में हो सकता है परिवर्तन
देहरादून
डाक्टर प्रवीण जिंदल, वरिष्ठ वैस्कुलर एवं एन्ड्रोवास्कुलर सर्जन डाक्टर प्रवीण जिंदल ने कहा है कि डीप वेन थ्रोम्बोसिस रोग खून का गहरी नाड़ियों में जमने से होता है। आज परेड ग्राउंड स्थित प्रेस क्लब में पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि खून के थक्के जमने से टांगों में सूजन, दर्द, भारीपन और रंग में परिवर्तन हो सकता है परंतु आधे से ज्यादा लोगों को कोई परेशानी नहीं होती, इसलिए इस रोग के लिए सचेत होना आवश्यक है अगर आपको शक है की आपको यह रोग हो सकता है तो आपको तुरंत अपने चिकित्सक को दिखाना चाहिए। उन्होंने इस रोग के कारण बताते हुए कहा कि जब आप निष्क्रिय होते हैं तो सम्भावना अधिक होती है और जैसे की अधरंग या अपंगता के कारण आपको लम्बे समय तक बिस्तर पर रहना पड़े या लम्बी वायुयान या कार द्वारा यात्रा, आप्रेशन या चोट जो आपकी नाड़ियों को खराब कर दे या फिर कैंसर भी इस रोग का कारण हो सकता है. कई लोगों में यह अनुवांशिक भी हो सकता है। इस अवसर पर इस रोग के लक्षण के बारे में उन्होंने बताया कि सूजन, गरम टांगें, टांगों में लाली, थकावट या दर्द, और खड़े होने पर या चलने पर दर्द का अचानक बढ़ जाना, अगर थक्का बहुत छोटा है तो कई बार कोई लक्षण नहीं पाए जाते हैं। उन्होंने इस रोग के निदान, पता कैसे चले के बार में बताया कि नाड़ियों का रंगीन अल्ट्रासाउंड, वेनोग्राम है और उपचार के बारे में बताया कि तुरंत उपचार कारगर रहता है। खून पतला करने की दवा, टांगें ऊंची रखना, टॉकिंग्स पहनना वगैरह से इससे होने वाली परेशानियों व् समस्यायों को कम किया जा सकता है और आपरेशन या लम्बी बीमारी के बाद जल्दी चलना फिरना, खून पतला करने दी दवाई लेना, लम्बी यात्रा के समय अपने पैरों का व्यायाम करना है। पल्मोनरी एम्बोलिस्म के लक्षण के बारे में बताया कि कभी कभी इस बीमारी से जानलेवा स्थिति उत्पन्न हो सकती है. इसे पल्मोनरी एम्बालिस्म कहते हैं और कुछ लोगों में इसी के कारण डीवीटी बीमारी का पता लगता है।

