अवैध तरीके से अर्जित की गयी सम्पत्ति का फ्रीज करने की तैयारी

हरिद्वार,

। पटवारी पेपर लीक प्रकरण में फरार चल रहे पचास हजार के इनामी को एसआईटी ने नारसन से दबोच लिया। जिसकी निशानदेही से एसआईटी ने हरियाणा से चार लाख पच्चीस हजार की नगदी, दो ब्लैंक चैक समेत अन्य दस्तावेज बरामद किये है। एसआईटी ने अभ्यर्थियों को नकल कराने के स्थल पर लाने में इस्तेमाल वाहन को भी जब्त किया है। पेपर लीक प्रकरण में अब तक 38 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। जिनमें मुख्यारोपियों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्यवाही की गयी है। आरोपियों द्वारा अवैध तरीके से अर्जित की गई सम्पत्तियों फ्रीज करने के सम्बंध में डीएम हरिद्वार को रिपोर्ट भी प्रेषित की गयी है। इस बात की जानकारी एसएसपी हरिद्वार अजय सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि पेपर लीक प्रकरण में फरार चल रहे पचास हजार के इनामी संजय धारीवाल पुत्र सुरेन्द्र सिंह निवासी मौहम्मदपुर जट कोतवाली मंगलौर हरिद्वार को नारसन से गिरफ्तार कर लिया। जिसकी निशानदेही से एसआईटी ने आरोपी के भाई सुधीर के हरियाणा के करनाल स्थित मकान से चार लाख पच्चीस हजार की नगदी, दो ब्लैंक चैक, अन्य दस्तावेज और अभ्यर्थियों को नकल कराने के स्थल तक ले जाने वाले वाहन को भी जब्त किया है। एसआईटी अब तक पेपर लीक प्रकरण में 38 आरोपियों की गिरफ्तारी कर चुकी है। जिनमें मुख्यारोपियों पर गैंगस्टर की कार्यवाही की जा चुकी है साथ ही अवैध तरीके से अर्जित की गयी सम्पत्ति को फ्रीज करने के सम्बंध में डीएम हरिद्वार को रिपोर्ट भी प्रेषित की गयी है। उन्होंने बताया कि संजय धारीवाल अपने गिरोह के साथ मिलकर पटवारी-लेखपाल एवं जेई-एई भर्ती में अभ्यर्थियों से लाखों रुपए व ब्लैंक चैक प्राप्त कर गिरफ्तारी से बचने व गिरफ्तारी स्थगित कराने तथा सरेंडर का प्रयास कर रहे फरार अभियुक्त संजय धारीवाल पर आईजी गढ़वाल रेंज करण सिंह नगन्याल द्वारा पचास हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था। संजय धारीवाल से बरामद की गयी धनराशि में से एक लाख दस हजार रुपये पटवारी भर्ती तथा तीन लाख पन्द्रह हजार रुपये व दोनों चैक एई-जेई भर्ती से सम्बन्धित छात्रों से लिए गए थे। कप्तान ने बताया कि विवेचना के दौरान पूर्व में ही आरोपी को आश्रय देने पर भाई सुधीर व बहन के जमाई दीपेन्द्र पंवार उर्फ सोनू पुत्र ऋषिपाल सिंह निवासी मुकन्दरपुर थाना गदरपुर जिला उधमसिंह नगर (कोचिंग संचालक) को गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोपी को मेडिकल के बाद न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय के आदेश पर आरोपी को जेल भेज दिया। पेपर लीक प्रकरण में एसआईटी द्वारा विवेचना अभी भी प्रचलित है।

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