हरिओम सरस्वती पीजी कॉलेज में आयो जित की गई राष्ट्रीय संगोष्ठी, कई राज्यों के प्रतिभागियों ने प्रस्तुत किए शोध पत्र
हरिद्वार।
उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. प्रेमचंद शास्त्री ने कहा कि संस्कृत देवों की भाषा है। देवभूमि के कण कण में देवता बसते हैं इसलिए देवभूमि में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया गया है।
हरिओम सरस्वती पीजी कॉलेज धनौरी में उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के सहयोग से आयोजित एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जितने भी धार्मिक ग्रंथ है उनकी रचना संस्कृत भाषा में हुई है। भारतीय भाषाओं के संदर्भ में हिंदी और संस्कृत भाषा का समन्वय विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए आरएसएस के प्रांत कार्यवाह दिनेश सेमवाल ने कहा कि
संस्कृत संस्कारों की भाषा है। भारतीय सभ्यता में संस्कारों की विशेष महत्ता है। नई पीढ़ी में संस्कारों के समावेश के लिए संस्कृत का अध्ययन किया जाना चाहिए। विधायक आदेश चौहान ने कहा कि हिंदी और संस्कृत भाषा के बीच हमेशा समन्वय रहा है। दोनों भाषाएं साथ-साथ चलती हैं।
संस्कृत शिक्षा निदेशक डॉ. एसपी खाली ने कहा कि संस्कृत और हिंदी दोनों भाषा भारत की आत्मा है। एक भाषा से जहां हमें आध्यात्मिक शिक्षा मिलती है वहीं दूसरी आम जनमानस के संपर्क की भाषा है। आरएसएस के विभाग प्रचारक चिरंजीवी ने कहा कि भाषाएं आपस में बहन होती हैं। कोई भी भाषा किसी दूसरी भाषा की प्रतिद्वंद्वी नहीं होती। इसलिए भाषाओं में हमेशा समन्वय होता है।
उद्घाटन सत्र को शिक्षा विभाग के वित्त अधिकारी सत्येंद्र डबराल, आरएसएस के पूर्व जिला कार्यवाह डॉ. अंकित कुमार, सह जिला कार्यवाह भूपेंद्र, सभासद अशोक मेहता आदि ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम संयोजक डॉ योगेश कुमार और प्राचार्य डॉ. आदित्य गौतम ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष सुमन देवी ने की। संचालन संस्कृत अकादमी के शोध अधिकारी डॉ. हरीश गुरुरानी ने किया।
इस अवसर पर डॉ ऐश्वर्या सिंह, डॉ. ज्योति जोशी, आयुषी पवार, दीपमाला कौशिक, डॉ. अरूणिमा पांडे, डॉ. साक्षी शर्मा, डॉ. प्रिया सैनी, डॉ. छवि डॉ. जयदेव कुमार, डॉ. निशा चौहान, डॉ. स्वाति, सरिता चंद्रा, डॉ. मोहित कुमार, डॉ. मीना नेगी, मोनिका चौधरी, डॉ. अंजू शर्मा, निशांत कुमार, दीपक चौधरी, रिमझिम, संजय कुमार आदि उपस्थित थे।

