रोडवेज कर्मचारियों ने खोला विलय आदेश के खिलाफ मोर्चा
रुड़की
उत्तराखंड परिवहन निगम ने सोमवार को खर्चे घटाने का हवाला देकर रुड़की डिपो की कार्यशाला को हरिद्वार में विलय कर दिया था। डिपो की तीस बसों का संचालन हरिद्वार से होने पर मुहर लगी थी। कार्यशाला के स्टाफ की ड्यूटी और वहां रखा सामान भी हरिद्वार पहुंचाने के आदेश दिए थे। मुख्यालय के नये आदेश से कर्मचारी मुखर हो गए। मंगलवार को रोडवेज के विभिन्न संगठनों ने एकजुट होकर निर्णय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। संयुक्त मोर्चा संघर्ष समिति के बैनर तले कर्मचारी डिपो परिसर में पहुंचे और आपातकालीन बैठक कर विभिन्न मुद्दों पर धरना शुरू किया। कर्मचारियों ने कहा कि रुड़की रोडवेज अड्डा करीब 60 साल से अस्तित्व में है। शिक्षा नगरी से हजारों यात्रियों का आना-जना डिपो की बसों से होता था। लेकिन अब उन हजारों यात्रियों की समस्याओं को मुख्यालय के नये आदेश ने बढ़ा दिया है। शहर की व्यावसायिक आय पर भी इसका फर्क पड़ेगा। रोडवेज की आए घटेगी और खर्च बढ़ेगा। कर्मचारियों ने कहा कि रुड़की रोडवेज डिपो का रिकॉर्ड रहा है कि वह आज तक कभी घाटे में नहीं गया। रुड़की डिपो ने सालों तक बेहतर कार्य कर परिवहन निगम को लाभ पहुंचाया है। लेकिन अब अधिकारियों ने डिपो को खत्म कर शहर की पहचान को भी समाप्त करने का काम किया है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि मुख्यालय ने जल्द हरिद्वार और रुड़की कार्यशाला के विलय के आदेश को वापस नहीं लिया तो वह आंदोलन को और तेज कर कार्य बहिष्कार करने को बाध्य हो जाएंगे। इस दौरान जगदीश बहुगुणा, सोम प्रकाश, इंद्रपाल, संदीप चौधरी, सचिन चौधरी, संदीप गोयल, उदयवीर, आजाद, सतीश सैनी, सुमन, रामकुमार शर्मा, नरेंद्र गुर्जर, आदिल, सरवर और किसान नेता चौधरी राजेंद्र सिंह, वेदपाल, बच्चन सिंह, राज सिंह राठी, रण पाल सिंह, श्रवण गोस्वामी, विवेक, प्रवीण प्रधान, दिनेश कौशिक, यशपाल सिंह राणा और रामकुमार गुर्जर आदि मौजूद रहे।
यात्रियों को नहीं मिल पाएगी समय से बस: रुड़की रोडवेज डिपो के पास 40 बसों का बेड़ा है। रोजाना रुड़की, देहरादून, दिल्ली, चंडीगढ़, हल्द्वानी और अन्य रूट पर बसों का संचालन होता है। देहरादून और दिल्ली रोड पर अधिकतर बसें भेजी जाती है। विलय के बाद अब निगम की सभी बसों को हरिद्वार भेज दिया जाएगा। किसी रूट पर जरूरत के समय रुड़की डिपो से बस नहीं भेजी जा सकेगी। भीड़ बढ़ने पर हरिद्वार से ही बसें फुल होकर रुड़की पहुंचेगी। यात्रियों को सीट न मिलने और 24 घंटे बसों की रुड़की से मिलने वाली सेवा भी समाप्त हो जाएगी।
अन्य राज्यों की बढ़ेगी आय: रुड़की से दिल्ली, देहरादून व अन्य रूट पर नियमित यात्रियों का आना जाना लगा रहता है। जिसकी वजह से यात्री अन्य प्रदेशों की जगह रुड़की व प्रदेश की डिपो की बसों का सहारा लेते हैं। लेकिन डिपो की बसों का हरिद्वार से संचालन होने पर यात्रियों को मजबूरन बाहरी प्रदेशों की डिपो का सहारा लेना पड़ेगा। जिससे राज्य की आय घटेगी।
6 हजार यात्री करते हैं रोजाना सफर: करीब छह हजार यात्री प्रतिदिन रुड़की डिपो की बसों से सफर करते हैं। इसके अलावा अन्य डिपो की बसों में भी हजारों यात्रियों का दिन प्रतिदिन आना-जाना रुड़की बस अड्डे से लगा रहता है। लेकिन अब हजारों यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि हरिद्वार से सीधा संचालन देहरादून, दिल्ली व अन्य लोकल रूट पर होगा। यात्रियों को भी बसों का इंतजार करने को मजबूर होना पड़ेगा।
विधायक को सौंपा ज्ञापन: रोडवेज कर्मचारियों ने निगम मुख्यालय और अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की। शहर विधायक प्रदीप बत्रा को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि वह परिवहन मंत्री से मिलकर हरिद्वार और रुड़की कार्यशाला के विलय के आदेश को निरस्त करा कर कर्मचारियों को राहत दिलाए। कर्मचारियों ने भी मुख्यमंत्री से मिलकर समस्या बताकर विलय का आदेश वापस कराने की बात कही है।
