घोटालों की लंबित जांच के बावजूद अफसर को बैठा दिया सर्वोच्च पद पर: मोर्चा
विकासनगर
जन संघर्ष मोर्चा ने आरोप लगाया कि सरकार ने जिस अधिकारी को अक्तूबर 2021 में यूपीसीएल में उच्च पद पर नियुक्त किया है। उस अधिकारी के खिलाफ 160 एमवीए ट्रांसफार्मर एवं 40 एमवीए ट्रांसफॉमर्स की गुणवत्ता और खरीद मामले में तीन वर्ष से जांच लंबित है। कहा कि इसके बावजूद ऐसे अधिकारी को यूपीसीएल और पिटकुल के उच्च पद का अतिरिक्त चार्ज दिया गया। कहा कि उक्त अधिकारी की नियुक्ति ने सरकार की भी पोल खोलकर रख दी है। जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष और जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने रविवार को विकासनगर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि सचिव, ऊर्जा द्वारा वर्ष 2019 में घोटाले का संज्ञान लेते हुए इस प्रकरण पर तीनों निगमों के प्रबंध निदेशकों एवं निदेशक (परिचालन) यूपीसीएल की एक संयुक्त कमेटी का गठन करते हुए उक्त घोटाले की जांच बैठाई। कहा कि तब सचिव ने इस मामले में जल्द जांच रिपोर्ट सौंपने के भी निर्देश दिए। लेकिन जांच रिपोर्ट अब तक शासन को नहीं मिल पाई। नेगी ने कहा कि इस मामले में उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग को लेकर भी तत्कालीन एमडी यूपीसीएल दीपक रावत ने नवंबर 2021 को शासन को पत्र प्रेषित किया था। आरोप लगाया कि उक्त अधिकारी ने अपनी ऊंची पहुंच के चलते जांच रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डलवा दिया है। नेगी ने कहा कि झाझरा उप संस्थान के 80 एमवीए ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने के मामले में उक्त अधिकारी भूमिका की जांच कराई गयी थी। जिसमें उक्त अधिकारी को दोषमुक्त करार दिया गया। कहा कि उक्त अधिकारी की जांच की जानी चाहिए। कहा कि मोर्चा पूर्व इस मामले की शिकायत राजभवन में कर चुका है। इस मौके पर मोर्चा महासचिव आकाश पंवार, विनय कांत नौटियाल, विजय राम शर्मा व जाबिर हसन मौजूद रहे।
