बेस अस्पताल में रैपिड जांच नहीं होने पर भड़के युवा
श्रीनगर गढ़वाल
मेडिकल कॉलेज के बेस अस्पताल में रैपिड जांच कराने पहुंची छात्राओं की जांच न होने पर युवाओं ने आक्रोश व्यक्त किया। युवाओं ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। आक्रोशित युवाओं ने एमएस व मेडिसिन विभाग के डॉक्टर का घेराव कर अस्पताल प्रशासन पर कोविड जांच कराने पहुंच रहे लोगों को परेशान करने का आरोप लगाया।
गढ़वाल विवि के पूर्व छात्र संघ महासचिव एवं एबीवीपी के केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य ऋतांशु कंडारी ने कहा कि गुरुवार को जवाहर नवोदय विद्यालय की कुछ छात्राएं बेस अस्पताल में रैपिड जांच कराने पहुंची, लेकिन उनकी जांच नहीं की गई। कहा कि छात्राओं की परीक्षा थी और उन्हें रैपिड जांच कराकर स्कूल में दिखानी थी। जांच न होने की सूचना मिलने पर वह अस्पताल पहुंचे तो मेडिसिन विभाग के डॉ. केएस बुटोला ने जांच न होने की बात कही। कंडारी ने इस दौरान बुरा व्यवहार करने का आरोप भी लगाया। इसी बीच वहां अन्य युवक भी जुट गए। युवाओं ने आक्रोश जताते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने अस्पताल के एमएस कार्यालय पहुंचकर गहरा रोष व्यक्त करते हुए डॉ. बुटोला से वार्ता की मांग की। डॉ. बुटोला के एमएस कार्यालय पहुंचने पर युवाओं ने अपनी शिकायत उनके समक्ष रखी। कुछ देर नोकझोंक के बाद मामला सुलझ पाया। इस मौके पर संदीप राणा, ऋषभ बिष्ट, शक्ति जोशी, ऋषभ रावत, देवेंद्र राणा, मुकुल, अमित रावत, सभासद विभोर बहुगुणा मौजूद रहे।
इनका कहना है:
आईसीएमआर की नई गाइडलाइन के तहत जिन लोगों में कोविड के लक्षण हैं, उन्हीं की रैपिड जांच कराई जा रही है। बिना लक्षण वालों के लिए आरटीपीसीआर जांच के निर्देश हैं। जो छात्राएं जांच के लिए पहुंची थीं उनमें कोविड के कोई लक्षण नहीं थे, इसलिए आरटीपीसीआर जांच को कहा गया था। बुरा व्यवहार करने जैसी कोई बात नहीं है। – डॉ. केएस बुटोला, मेडिसिन विभाग
छात्रों के साथ बुरा व्यवहार करने की बात निराधार है। जरूरतमंद की रैपिड जांच भी कराई जा रही है। -डॉ. केपी सिंह, एमएस

