तीन दिवसीय भारतीय छात्र संसद के 12वें संस्करण के समापन दिवस पर विस अध्यक्ष ने किया प्रतिभाग

देहरादून

पुणे में एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित तीन दिवसीय भारतीय छात्र संसद के 12वें संस्करण के समापन दिवस पर उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने सम्मेलन में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) विषय पर अपना संबोधन दिया। इस अवसर पर भारतीय छात्र संसद का आयोजन पुणे में एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी की ओर से भारतीय छात्र संसद फाउंडेशन और केंद्रीय खेल एंव युवा कल्याण मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान किया गया। इस अवसर पर आयोजित भारतीय छात्र संसद के 12वें संस्करण में देशभर से विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गज युवा समेत 10 हजार से अधिक छात्रो ने भाग लिया। इस अवसर पर शिक्षित युवाओं को राजनीतिक में आगे लाने के उद्देश्य से आयोजित इस संसद में सभी राजनीतिक दल, विचारधाराओं के लोगों ने शामिल होकर विभिन्न मुद्दों पर सार्थक चर्चा की। तीन दिवसीय भारतीय छात्र संसद में कई केंद्रीय मंत्री, राज्यसभा सांसद, अलग अलग राजनीतिक दलों के राष्ट्रीय प्रवक्ता, राजनीतिक, सामाजिक, मीडिया, अभिनय, उद्योग, कानून, आध्यात्मिक व खेल क्षेत्र के अनेक दिग्गज युवा शामिल हुएद्य इस छात्र संसद में भाषण स्वतंत्रता, वंशवाद, भारतीय मीडिया, समान नागरिकता संहिता जैसे विषयो पर चर्चा हुई। इस छात्र संसद में देशभर से हजारों छात्र वर्चुअल माध्यम से भी जुड़े। इस अवसर पर सम्मेलन के दौरान विधानसभा अध्यक्ष का जोरदार स्वागत कर सम्मान किया गया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा की भारत देश में राजनीति के क्षेत्र में बहुत से युवा आगे आ रहे हैं और उन युवाओं को राजनीति में आने का भारतीय छात्र संसद के माध्यम से बड़ा मंच मिलता है, ऐसे में युवा अपने सपने को साकार भी कर सकते हैं। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने देश के सबसे महत्वपूर्ण विषय समान नागरिक संहिता पर अपने वक्तव्य रखते हुए कहा कि इसका अर्थ भारत में रहने वाले हर नागरिक के लिए एक समान कानून होना, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो। उन्होंने कहा की भारत एक धर्म निरपेक्ष देश है संविधान बनाते समय ही इसका जिक्र कानून में कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि संविधान में समान नागरिक संहिता की चर्चा अनुच्छेद 44 में की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य के नीति-निर्देशक तत्व से संबंधित इस अनुच्छेद में कहा गया है कि ‘राज्य, भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता प्राप्त कराने का प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि भारत की नई पीढ़ी बदल चुकी है, उसे धर्म व जाति के बंधन से मुक्त कर समान कानून के दायरे में लाने की जरूरत है। समान नागरिक संहिता महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेगी। विधानसभा अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड राज्य में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा समान नागरिक संहिता के परीक्षण और क्रियान्वयन के लिए जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है साथ ही समिति द्वारा तेजी से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता कानून के लिए जनता के सुझावों को लिया जा रहा है जनता से जो सुझाव प्राप्त होंगे, उन सूचनाओं का विश्लेषण किया जाएगा ताकि बेहतर रिपोर्ट तैयार की जा सके।

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