पीएम बताएं, नोटबंदी से देश की जनता को क्या फायदा मिला? कांग्रेस
देहरादून
महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष लालचन्द शर्मा ने कहा है कि आज के दिन आठ नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट चलन से बाहर कर दिए थे। इसे लेकर बडे़-बड़े दावे किए गए। स्थिति उलट साबित हुई। अब नोटबंदी के छह साल बाद कांग्रेस केंद्र सरकार के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बताना चाहिए की नोटबंदी से देशवासियों को क्या फायदे हुए है। यहां देहरादून महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष लालचंद शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सवाल पूछा कि नोटबंदी से देश की जनता को क्या फायदा मिला। इसकी जानकारी देश की जनता को दी जानी चाहिए। उन्हांेने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अभी तक ‘‘नोटबंदी’’ की विफलता को स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि इसके कारण अर्थव्यवस्था नीचे आ गई। इस अवसर पर लालचंद शर्मा ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जनता के पास मुद्रा 21 अक्टूबर तक 30.88 लाख करोड़ रुपये के नए उच्च स्तर पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि यदि नोटबंदी से देश को फायदा होता तो क्या ऐसे दिन देश को देखने पड़ते। उन्होंने कहा कि सरकार ने नोटबंदी को मास्टरस्ट्रोक बताया था। इस मास्टरस्ट्रोक के छह साल बाद सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नकदी 2016 की तुलना में 72 प्रतिशत अधिक है। इस अवसर पर लालचंद शर्मा ने कहा कि कहा कि देश को काले धन से मुक्त कराने के लिए नोटबंदी का वादा किया गया था। इसके उलट पीएम मोदी के इस फैसले ने व्यवसायों को नष्ट कर दिया और नौकरियों को बर्बाद कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अभी तक इस बड़ी विफलता को स्वीकार नहीं किया है, जिसके कारण अर्थव्यवस्था गिर गई। उन्होंने कहा कि सेंटर फॉर मॉनिटरिंग के आंकड़े लगातार बता रहे हैं कि नोटबंदी के बाद करोड़ों की संख्या में लोगों की नौकरियां गई हैं। इस अवसर पर लालचंद शर्मा ने कहा कि नोटबंदी के पड़े असर के बाद करोड़ों लोगों को फैक्ट्रियों और सेवा क्षेत्रों से निकाल दिया गया। सरकारी विभागों में तो नौकरियों की किल्लत लगातार बढ़ ही रही थी। इधर नोटबंदी के बाद निजी कंपनियों में भी नौकरियों के लाले पड़ने लगे हैं। साथ ही बड़े पैमाने पर छंटनी की गई। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद कहा था कि इससे नक्सल और आतंक समाप्त हो जाएगा, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि नोटबंदी के बाद संबंधित क्षेत्रों में नक्सल और आतंकवाद में बढ़ोत्तरी हुई है।

