साहित्य सृजन की अहम भूमिका में है संस्कृत भाषा: डा. जोरावर
चमोली। डा. शिवानंद नौटियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् द्वारा भारतीय ज्ञान परम्परा में दर्शन का योगदान (राजनीतिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में) पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें बतौर मुख्य वक्ता हरियाणा महाविद्यालय के डा. जोरावर सिंह ने कहा संस्कृत भाषा को पुरातन भाषा का दर्जा है और पुरातनकाल में संस्कृत भाषा को साहित्य सजृन की जननी के रूप में जाना जाता है, जिसका पुख्ता सबूत हमारे वेद-पुराण है। दो दिवसीय कार्यक्रम के समापन अवसर पर डा. जोरावर ने संस्कृत विषय पर कई जानकारियां दी। कार्यक्रम में प्रभारी प्राचार्य डा. एमएस कंडारी, डा. हरीश रतूड़ी व डा. वाईसी नैनवाल संस्कृत की महत्ता को रखते हुए युवा पीढ़ी से साहित्य अध्ययन को जरूरी बताया। कार्यक्रम में डा.मृगांक मलासी, डा. हरीश बहुगुणा, डॉ.कविता पाठक, डॉ. चंद्रावती टम्टा, असिस्टेंअ प्रोफेसर कीर्तिराम डंगवाल, डॉ. आर.सी. भट्ट , डा.मदन लाल शर्मा सहित कई ने अपने विचार व्यक्त किए।

