वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की शौर्य गाथा को किया याद

देहरादून

वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की याद में हमारी विरासत के नाम से आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश भर के बुद्धिजीवियों, आंदोलनकारियों और आम नागरिकों ने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की इंसानियत, देशभक्ति और शौर्य गाथा को याद किया। शहीद स्मारक पर हुई संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि आज के माहौल में चंद्र सिंह गढ़वाली के सिद्धांतों को अमल करने की ओर भी ज़रूरत है। हमारी विरासत के तहत देहरादून, चमियाला, पौड़ी, श्रीनगर, अगस्तमुनि, अल्मोड़ा, रामगढ़ और अन्य जगहों में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली और पेशावर काण्ड की याद में कार्यक्रम आयोजित हुए। जहां सैकड़ों लोग इन कार्यक्रमों में शामिल हुए। प्रदेश भर में लोगों ने छोटे छोटे समूह में बैठ कर उनके सिद्धांतों पर चर्चा की। सोशल मीडिया पर हैशटैग इंसानियत मेरी विरासत और हैशटैग वीर चंद्र सिंह गढ़वाली अमर रहे के साथ लोगों ने फोटो पोस्ट किए। हमारी विरासत के नाम से इन कार्यक्रमों के दौरान सभी ने चंद्र सिंह गढ़वाली को याद किया। शहीद स्मारक में उत्तराखंड महिला मंच, चेतना आंदोलन व जन संवाद समिति की ओर से चर्चा हुई। जिसमें कहा गया कि नफरत, झूठ और भय से भरा हुए माहौल में गढ़वाली जी के सिद्धांत ओर भी ज़रूरी हो जाते हैं। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली और उनके सिपाहियों ने अपनी इंसानियत और देशभक्ति नहीं खोई। जिसकी वजह से गढ़वाली जी को 14 साल जेल में रहना पड़ा। आज़ादी के बाद भी गढ़वाली जी लगातार न्याय के लिए लड़ ते रहे। ऐसे ही इंसानियत और लोकतान्त्रिक विचार आज भी बहुत ज़रूरी है। महिला मंच की कमला पंत कार्यक्रम अध्यक्ष रहे। मौके पर लेखक डॉ. जीतेन भारती, भारतीय किसान सभा के गंगाधर नौटियाल, इतिहासकार डॉ. भरतवाल, पर्यावरणविद डॉ. रवि चोपड़ा, चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल और सुनीता, उत्तराखंड महिला मंच की निर्मला बिष्ट, सीपीएम के एसएस सजवाण, भारत ज्ञान विज्ञान समिति के विजय भट्ट, उत्तराखंड लोकतान्त्रिक मोर्चा के एसएस पांगती, पीसी थपलियाल, डॉ. विजय धस्माना, फ्रेंड्स ऑफ़ हिमालय के प्रेम बहुखंडी मौजूद रहे। भारत ज्ञान विज्ञान समिति की उमा भट्ट ने सभा का संचालन किया।

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