यूरिया खाद न मिलने से किसान परेशान
रुड़की
क्षेत्र के करीब चालीस हजार किसान यूरिया खाद के लिए गन्ना समिति व सहकारी समितियों के चक्कर काट रहे हैं। समितियों पर न यूरिया है, और न ही जल्दी आने की उम्मीद है। दरअसल समितियों से बिके खाद का डाटा ऑनलाइन नहीं हुआ है। इससे सरकारी दस्तावेजों में अभी समितियों पर स्टॉक मौजूद दिखा रहा है। लक्सर तहसील में चालीस हजार से अधिक किसान हैं। इन किसानों को इस समय अपने खेत में खड़ी गन्ने की फसल के साथ ही पशुओं के हरे चारे के लिए बोई गई चरी, ज्वार व बाजरा की फसल में डालने को यूरिया खाद की जरुरत पड़ रही है। इनमें से ज्यादातर किसान लक्सर की गन्ना समिति या अपनी किसान सेवा सहकारी समिति से खाद लेते हैं। यहां से एक तो किसानों को साल भर के लिए उधार खाद मिल जाता है, दूसरे इफको से सीधी आपूर्ति होने के कारण इसमें मिलावट की संभावना भी नहीं होती है। किसान बिजेंद्र सिंह, राजपाल सिंह, अजब सिंह ने बताया कि पिछले काफी दिनों से समितियों पर यूरिया खाद नहीं है। राजवीर, नरेंद्र पंवार, सुभाषचंद ने बताया कि बड़े किसान तो बाजार से यूरिया खरीदकर पूर्ति कर रहे हैं, पर छोटे किसान के पास पैसा न होने से फसल खराब हो रही है। केहड़ा के पूर्व प्रधान समय सिंह ने बताया कि किसान को जरुरत के समय समितियों पर खाद नहीं मिलती है। बताया कि वे देहरादून से यूरिया मंगवाकर खेतों में डलवा रहे हैं। इस बाबत इफको के जिला प्रबंधक डॉ. रामभजन सिंह ने बताया कि समितियों पर खाद का स्टॉक ऑनलाइन होता है। कई बार समितियां खाद बेच तो देती हैं, पर इसका डाटा ऑनलाइन नहीं करती। इससे अभी जिले की समितियों पर यूरिया का ऑनलाइन स्टॉक काफी दिख रहा है। ऑनलाइन स्टॉक निल होने पर ही खाद आने की संभावना है।
