सीयूईटी की अनिवार्यता पर दिल्‍ली यूनिवर्सिटी-स्‍टीफेंस कॉलेज में टकराव, क्या होगा छात्रों के एडमिशन का!

नई दिल्‍ली

प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान में पढ़ने का सपना रखने वाले छात्रों को सीयूईटी टेस्ट के बाद भी असमंजस का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, दिल्‍ली यूनिवर्सिटी और स्‍टीफेंस कॉलेज के बीच विवाद अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है। जहां कॉलेज एक ओर बीते वर्षों की तरह इंटरव्‍यू के आधार पर एडमिशन देने पर अड़ा है, वहीं यूनिवर्सिटी ने कॉलेज को स्‍पष्‍ट निर्देश दिया है कि सीयूईटी के बगैर किए गए एडमिशन को डीयू मान्‍यता नहीं देगा। सेंट स्टीफंस कॉलेज ने डीयू को एक पत्र लिखकर कहा है कि वह 1992 के सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसले के अनुसार इंटरव्‍यू को 15 प्रतिशत वेटेज दे रहे हैं। कॉलेज ने कुलसचिव को लिखा है कि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने की कोशिश की जानी चाहिए। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी ने कॉलेज को लिखा था कि 50 प्रतिशत गैर-अल्पसंख्यक सीटों पर एडमिशन के लिए सीयूईटी ही एकमात्र मानदंड होना चाहिए।
डीयू वीसी ने अपने दिए एक इंटरव्‍यू में स्पष्ट किया है कि अगर कॉलेज दिशानिर्देशों का पालन नहीं करेगा तो एडमिशन अमान्‍य कर दिए जाएंगे। ऐसे में वे छात्र जो कॉलेज में 15 फीसदी सीटों पर इंटरव्‍यू के आधार पर एडमिशन पाएंगे, उन्‍हें यूनिवर्सिटी द्वारा मान्‍यता नहीं मिलेगी जिससे पूरी डिग्री रद्द होने का खतरा होगा। बता दें कि दिल्‍ली यूनिवर्सिटी ने कॉलेजों को निर्देश दिया था कि वह आरक्षित सीटों के अतिरिक्‍त अन्‍य सभी सीटों पर एडमिशन सीयूईटी के तहत ही लेंगे। इसके बाद दिल्‍ली के स्‍टीफेंस कॉलेज ने अपना एडमिशन प्रॉस्‍पेक्‍टस जारी किया जिसमें जानकारी थी कि केवल 85 फीसदी सीटों पर के तहत एडमिशन होंगे जबकि बाकी 15 फीसदी सीटों के लिए कॉलेज इंटरव्‍यू के माध्‍यम से ही एडमिशन लेगा।
डीयू ने स्‍टीफेंस कॉलेज को नोटिस जारी कर निर्देश दिया था कि वह प्रॉस्‍पेक्‍टस को कॉलेज की वेबसाइट से हटाए और निर्धारित नियमानुसार ही एडमिशन ले। मगर अब कॉलेज द्वारा डीयू को भेजे गए पत्र के बाद स्थिति जस की तस हो गई है। स्‍टीफेंस कॉलेज ने फिलहाल तो डीयू का निर्देश मानने से इंकार कर दिया है। ऐसे में कॉलेज में अंडरग्रेजुएट कोर्सेज में एडमिशन पाने वाले छात्रों का भविष्‍य अधर में लटक जाएगा।

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