जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव की जन्मभूमि शाश्वत तीर्थ

अयोध्या से जैन दर्शन के अनेकान्त सिद्धान्त का शुभारंभ कल

लखनऊ

उत्तर प्रदेश जैन विद्या शोध संस्थान ,संस्कृति विभाग उ.प्र. के तत्वावधान में 4 जून को प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव की जन्मभूमि शाश्वत तीर्थ अयोध्या से जैन दर्शन के अनेकान्त सिद्धान्त का शुभारंभ सायं 04:30 बजे जैन मन्दिर प्रागंण से होगा।
अनेकान्त प्रवर्तन का शुभारंभ रामजन्मभूमि न्यास के महासचिव  चंपत राय करेंगें। जैन शोध संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो.(डॉ.) अभय कुमार जैन ने बताया कि अनेकान्त सिद्धांत मानवीय गुणों का विकसित कर सहिष्णुता प्रदान करता है। अनेकान्त सिद्धांत परस्पर विरोधी विचाधाराओं को समन्वित कर सभी प्रकार के संघर्ष समाप्त करता है। वर्तमान समय में इस सिद्धांत की उपयोगिता सर्वाधिक है।
05 जून को संत कबीर सभागार डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में “जनकल्याण हेतु अनेकान्त सिद्धान्त” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन पूर्वाह्न 10:30 बजे होगा। गोष्ठी में देश के जैन विद्वानों के व्याख्यान आयोजित होंगे। मंत्री संस्कृति एवं पर्यटन जयवीर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में सम्मलित होगें।
इस अवसर पर उ.प्र. जैन विद्या शोध संस्थान द्वारा प्रकाशित पुस्तक ” हिन्दी साहित्य उन्नायक साहित्यकार पण्डित टोडरमल” का विमोचन होगा। संस्थान के निदेशक डॉ. राकेश सिंह ने बताया कि 200 प्रतिभागी और देश के 10 विद्वानों की सहमति प्राप्त हो चुकी है।

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