महफिल शमां के बाद साबिर पाक का उर्स संपन्न
रुड़की
साबिर पाक के 754 वे उर्स की 17 तारीख को हजरत साबिर पाक के वालिद माजिद हज़रत अब्दुर्रहीम अब्दुलसलाम की याद में कुल शरीफ किया गया। उसके बाद आखरी महफिल शमां शुक्रवार देर रात सम्पन्न हुई। साहिबजादा शाह खालिक मियां साबरी कुद्दुसी की सरपरस्ती में अलीगढ़ की खानकाहे फैजाने वाहिद के गद्दीनशीन सयैद फरीद मियां साबरी समेत कई सज्जादगान, सूफियों, कव्वालों और अकीदतमन्दों ने महफिले शमां में शिरकत की। साबिर पाक के सालाना उर्स की 17 तारीख को आखरी महफिल शमां के बाद साबिर पाक का 754 वां उर्स पूरी तरह सम्पन्न हो गया है। साबिर पाक के सालाना उर्स की 17 तारीख को दूर दराज से आए सूफी सन्तों अपनी अपनी जगह पर महफ़िल ए शमां का आयोजन कर साबिर पाक की बारगाह में खराजे अकीदत पेश करते हैं। उर्स की 17 राबीउल अव्वल की रात को साबिर पाक के वालिद ए माजिद हज़रत अब्दुर्रहीम अब्दुलसलाम की याद में कुल शरीफ किया गया। इसके बाद महफिले समां का आयोजन किया गया। जिसकी सरपरस्ती साहिबजादा शाह खालिक मियां साबरी कुद्दुसी ने की। महफिले शमां में दरगाह साबरी जामा मस्जिद के इमाम हाफिज सऊद साबरी और शाह खलीक मियां ने देश में अमनो अमान व खुशहाली के लिए दुआ कराई। दुआ के बाद साबिर पाक का 754वां सालाना उर्स सम्पन्न हो गया। शनिवार सुबह तक महफिले शमां का दौर चलता रहा। देश के कोने कोने से आए कव्वालों ने सूफियाना कलाम पढ़ कर समां बांधा। शाह खालिक मियां साबरी ने बताया कि 17 रबीउलअव्वल की ये महफ़िल हज़रत साबिर पाक के वालिद हज़रत अब्दुल रहीम अब्दुल सलाम की याद में सालों से आयोजित होती आ रही है जो इस बार भी जारी रही। इस अवसर पर अलीगढ़ की खानकाहे फैजाने वाहिद के गद्दीनशीन सयैद फरीद मियां साबरी, शायर अफजल मंगलौरी, शाह यावर ऐजाज साबरी, शाह सुहैल मियां, सूफी राशिद साबरी, असद साबरी, राव आफाक, आजम शकील राव सिकन्दर, नोमी मियां, नियाजी साबरी, नमीर साबरी आदि मौजूद रहे।

