गीता में बताई गई है जीवन जीने की कला: मिश्र
हरिद्वार
भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में साप्ताहिक गीता पाठ का समापन हो गया। प्रभारी प्राचार्य डॉ. व्रजेन्द्र कुमार सिंहदेव ने कहा कि गीता एक ऐसा शास्त्र है जिसके पाठमात्र से ही मनुष्य मुक्ति प्राप्त कर सकता है। गीता काम,क्रोध, लोभ, मोह को दूर करने के लिए मार्ग प्रदान करती है। कई सम्प्रदायों के धर्मग्रन्थों के होते हुए भी गीता को विशिष्ट स्थान प्राप्त है। साहित्य विभागाध्यक्ष डॉ.निरंजन मिश्र ने कहा कि वर्तमान में प्रत्येक युवा को गीता का ज्ञान दिया जाना चाहिए। गीता में सही रूप से जीवन जीने की कला बताई गई है और कर्तव्य बुद्धि से कर्म करने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि कर्म का फल ईश्वर को अर्पित कर देने से उससे होने वाले पाप के भागी हम नहीं होते हैं। उन्होंने कहा कि गीता ही इस देश को सभी समस्याओं से मुक्त कर सकती है। व्याकरण विभागाध्यक्ष डॉ.रवीन्द्र कुमार आर्य ने कहा कि गीता विश्व की अद्भुत सम्पत्ति है। गीता हमें शिक्षा देती है कि व्यक्ति को कभी निराशावादी नहीं होना चाहिए। विभाग की सहायकाचार्य डॉ.मंजू पटेल ने कहा कि भीष्म पर्व से उद्धृत यह गीता कर्म का उपदेश देती है कर्म ही मनुष्य का ध्येय है। गीता की यह सार्थक प्रेरणा प्राणीमात्र के जीवन हेतु परमावश्यक है। अंग्रेजी विषय की सहायकाचार्य डॉ.आशिमा श्रवण ने कहा कि गीता हमें जीवन के उद्देश्य को खोजने के लिये कोमलता, मधुरता, शक्ति आदि प्रदान करती है। कार्यक्रम में विवेक शुक्ला, जगदीश पोखरिया, अंकित आदि उपस्थित रहे। साप्ताहिक कार्यक्रम का संचालन व्याकरण विभाग के प्राध्यापक डॉ.दीपक कोठारी ने किया।

